मुख्य पृष्ठ  | संबंधित लिंक   | सूचना का अधिकार  | सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्न  | सम्पर्क   | साइट मानचित्र | भा.वा.अ.शि.प. वेबमेल  | नागरिक चार्टर   | English Site 

भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद

(पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय, भारत सरकार )
Select Theme:
 वार्षिक सम्पति विवरण पोर्टल   |   गेस्ट हाउस बुकिंग पोर्टल   |   इंटरएक्टिव पोर्टल: हितधारकों के साथ इंटरफेस
The President of India, Shri Pranab Mukherjee receiving the Report on ‘Health Status and Age Assessment of the Trees of Rashtrapati Bhavan’ from Dr. Savita, Director, Forest Research Institute, Dehradun at Rashtrapati Bhavan on the eve of demitting office as the 13th President of India on July 24, 2017

मुख्य पृष्ठ » संस्थान »व.व.अ.सं., जोरहाट

वर्षा वन अनुसंधान संस्थान, जोरहाट

RFRI Johrat

वर्षा वन अनुसंधान संस्थान, जोरहाट भा.वा.अ.शि.प., देहरादून के संघटक संस्थानों में से एक है। यह संस्थान देश के उत्तर पूर्व क्षेत्र की वानिकी संबंधित अनुसंधान तथा विस्तार की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए 1988 में अस्तित्व में आया। संस्थान वानिकी अनुसंधान के सभी विषयों को शामिल करता है। हाल ही में संस्थान के अधीन आइजॉल, मिजोरम में बांस तथा बेंत के लिए उन्नत अनुसंधान केंद्र की स्थापना की गई है।


निदेशक, वर्षा वन अनुसंधान संस्थान, जोरहाट का संदेश


डॉ आर. एस. सी. जयराज

निदेशक वर्षा वन अनुसंधान संस्थान, जोरहाट

वर्षा वन अनुसंधान संस्थान, जोरहाट, भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद्, देहरादून का संघटन है जिनका मुख्य ध्येय जन आधारित वानिकी अनुसंधान एवं विस्तार क्रिया-कलापों के द्वारा उत्तर-पूर्व परिषद् के राज्यों का सतत् विकास करना है। भारत का उत्तर- पूर्वी क्षेत्र पारितंत्रीय, सामाजिक- आर्थिक, संस्कृति, स्थलाकृति, जलवायु एवं जातीय दृष्टिकोण से अत्यन्त वैविध्यपूर्ण है। इस क्षेत्र में भारत के करीब एक चैथाई वन हैं जो आर्थिक विकास की बढ़ती हुई गति के कारण अत्यन्त दबाव में हैं। जैवविविधता की दृष्टि से यह क्षेत्र विश्व के मुख्य स्थलों में से एक है इसलिए यहां संरक्षण एवं विकास में सामंजस्य बनाने की आवश्यकता है।
इस क्षेत्र में वानिकी अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी विकास के प्रचुर सुअवसर विद्यमान हैं जिनका उपयोग करते हुये यह संस्थान, गरीबी उन्मूलन एवं सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रयासरत है। इस संस्थान के दो केंद्र हंै: बांस एवं बेंत उच्च अनुसंधान केंद्र, आईजाॅल, मिजोरम तथा वन आधारित आजीविका विस्तार केंद्र, अगरतला, त्रिपुरा।
 संस्थान का दर्शन

संस्थान का दर्शन अपने आप को “बांस के लिए श्रेष्ठ केंद्र” के रूप में विकसत करना है।

संस्थान के अधिदेश

  1. प्राकृतिक पुनर्जनन पर प्रभाव सहित वन पारितंत्र संरक्षण.

  2. बदलते हुए कृषि क्षेत्रों का प्रबंधन .

  3. सांझा वनों का प्रबंधन.

  4. पारि पुनरूद्धार के लिए रोपण कार्यप्रणालियां

  5. बांस तथा बेंत का संरक्षण तथा धारणीय प्रबंधन

 

हाथ में ली गई परियोजानएं

पूरी की गई परियोजनाएं 2008-2009 2009-2010 -
जारी परियोजनाएं - - -
नई प्रारंभ परियोजना - - -
बाह्य सहायता प्राप्त
नई प्रारंभ परियोजना - - -
जारी परियोजनाएं - - -
नई प्रारंभ परियोजना - - -

 

 

नाम

पद दूरभाष-कार्यालय दूरभाष-निवास ई-मेल

डॉ आर. एस. सी.  जयराज

निदेशक वर्षा वन अनुसंधान संस्थान, जोरहाट

+91-376-2305101

+91-376- 

dir_rfri@icfre.org
 

अधिक जानकारी के लिए : http://rfri.icfre.gov.in

 

अस्वीकरण ( डिस्क्लेमर): दिखाई गई सूचना को यथासंभव सही रखने के सभी प्रयास किए गए हैं। वेबसाइट पर उपलब्ध सूचना के अशुद्ध होने के कारण किसी भी व्यक्ति के किसी भी नुकसान के लिए भारतीय वानिकी अनुसन्धान एवं शिक्षा परिषद उत्तरदायी नहीं होगा। किसी भी विसंगति के पाए जाने पर head_it@icfre.org के संज्ञान में लाएं।