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भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद

(पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय, भारत सरकार )
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The President of India, Shri Pranab Mukherjee receiving the Report on ‘Health Status and Age Assessment of the Trees of Rashtrapati Bhavan’ from Dr. Savita, Director, Forest Research Institute, Dehradun at Rashtrapati Bhavan on the eve of demitting office as the 13th President of India on July 24, 2017

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वन संवर्धन संग्रहालय

वन संवर्धन संग्रहालय वनों के प्रभावी तथा वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए उपयोग किए गए वन संवर्धन तंत्रों के प्रतिदर्श तथा चित्र प्रदर्शित करता है। सबसे महत्वपूर्ण प्रदर्शित वस्तु वन की कटाई विनिमयन तथा पुनर्जनन के लिए उपयोग किए गए मुख्य पद्धतियों को प्रदर्शित करता हुआ बड़े प्रतिदर्शों की एक श्रं‘खला है। साधारण उद्देश्य अधिकतम भुगतान आकार में प्रकाष्ठ की सतत आपूर्ति के लिए मृदा का पूरी तरह उपयोग करना है। ये पद्धतियां प्रजातियों, निष्कषर्ण सुविधाओं, बाजार की निकटता तथा बाजार आवश्यकताओं के साथ भिन्न-भिन्न होती है। वास्तविक क्रियाकलापों को प्रदर्शित करता एक चित्र प्रत्येक प्रतिदर्श के साथ दिया गया है।

एक प्रतिदर्श ऊँचाई आधारित विशेष क्षेत्र प्रदर्शित करता है। वनों में प्रजाति संघटन विभिन्न ऊँचाई विभिन्नता के कारण एक से दूसरे स्थान पर भिन्न होती है। इस प्रतिदर्श में उन वन प्रजातियों पर संकेत करने का प्रयत्न किया गया है जो मैदानों से ऊँची पहाड़ियों पर पाई जाती हैं। वानिकी क्रियाकलापों में उपयोग किए जाने वाले विभिन्न प्रकार के औजार प्रदर्शनीय वस्तुओं का एक अद्वितीय सेट बनाते है। भारत के वन्य जीवों के रेखा चित्र विद्यालय के बच्चों के लिए शिक्षाप्रद होते हैं।

प्रकाष्ठ संग्रहालय

wheelप्रकाष्ठ संग्रहालय में सबसे अच्छी तथा सबसे आम व्यापारिक काष्ठ की प्रदर्शनी है। 126 व्यवसायिक रूप से उपयोगी संग्रहालय की दीवारों के साथ प्रदर्शित प्रजातियां आगंतुकों को इन काष्ठों की विशेषताओं का अनुमान उपलब्ध करवाते हैं। तख्तों का निचला हिस्सा प्राकृतिक अवस्था में रखा गया है जबकि ऊपर के आधे हिस्से को प्रकाष्ठ की विशेषताएं बढ़ाने के लिए बिनौले के तेल का लेप किया गया है। तख्तों के ऊपर लटक रहे चित्रों में उन वृक्षों के चित्र हैं जिनके तख्त प्रदर्शित किए गए हैं तथा मानचित्र में भारत में उनके वितरण को दर्शा रहे हैं। साधारण भारतीय काष्ठ का ढ़ांचा एक अलग शोकेस में एक पारदर्शी फोटो माइक्रोग्राफ दिखाता है, जैसा एक माइक्रोस्कोप में दिखता है।

एक घन फीट हरे काष्ठ का नमूना 16 लीटर पानी रखता है तथा इसको संशोषण की आवश्यकता होती है। संशोषण के पश्चात पानी की एक महत्वपूर्ण मात्रा (2.7 लीटर) लकड़ी में रह जाती है। यदि काष्ठ का संशोषण न किया जाए तो विकुंचन, दरारे तथा घुमाव जैसे दोष पैदा हो जाते हैं। कई माडल वायु संशोषण, तना संशोषण, सौर भट्टा संशोषण की विभिन्न पद्धतियों का प्रतिनिधित्व कर रहे प्रदर्शित किए गए हैं। यह लम्बी फैलाव वाली ट्रसों के लिए कम परिमाप की प्रकाष्ठ को प्रयोग में लाने की प्रकाष्ठ अभियांत्रिकी प्रौद्योगिकी को चित्रित किया गया है। अलमारी रूपांकन विभिन्न प्रकाष्ठों तथा विभिन्न नमूनों को प्रयोग करके प्रदर्शित किया गया। हालांकि, आकर्षण का केंद्र 704 वर्षीय देवदार (कैडिरस देओदारा ) वृक्ष का अनुप्रस्थ काट है, जो कि 1919 में उत्तर प्रदेश की पहाड़ियों से काट गिराया गया था। वार्षिक चक्र को देखकर प्राकृतिक तथा जलवायु संबंधी घटनाएं आसानी से पढ़ी जा सकती है। कुतुबमीनार के निर्माण से लेकर जलियावाला बाग की घटना तक का भारतीय इतिहास का चित्रण इस प्रदर्शनी को बहुत अधिक रोचक बनाता है। एक दूसरा काट 330 वर्षीय टीक (टैकटोना ग्रान्डिस ) को प्रदर्शित की गई है। वालनट तथा पार्डोक बरर (तनों पर उद्वध (आउटग्रोथ)) नमूने भी आकर्षण का केंद्र है।

प्लाई वुड का लोकप्रिय तथा सस्ता उपयोग, परतदार काष्ठ, कम्प्रेजनेटिड काष्ठ, बांस के तख्ते तथा डायपर प्रदर्शित किए गए तथा बांस तथा लकड़ी के स्प्रिंग फर्नीचर के लिए तथा अन्य वस्तुएं प्रदर्शित की गई है। विभिन्न प्राकष्ठों में तुलनात्मक यांत्रिक गुण विभिन्न अंत उपयोग के लिए प्रदर्शित किए गए हैं। यहां एक रोजवुड, शीशम तथा अण्डमान पर्डोक से बना हुआ तोप गाड़ी का पहिया भी है।

अकाष्ठ वन उत्पाद संग्रहालय

 इस संग्रहालय में प्रदर्शित वस्तुएं पारंपरिक राल दोहन तथा राल दोहन के लिए नई विकसित रिल पद्धतियों की तुलना करती है। तारपीन के तेल तथा राल के नमूने तथा देश में पाई जाने वाली बांस की विभिन्न प्रजातियां एक अद्भुत संग्रह बनाती है। प्रदर्शनी में लघु वन उत्पाद जैसे कत्था, कच, लाख के उत्पाद, आवश्यक तेल, खाद्य पदार्थ, वसा वाले तेल, मसाले, दवाईयां, टैन, गोंद इत्यादि के नमूने भी हैं। यहां चलने में सहायता करने वाली छड़ी, लाठी, खेल का सामान, कागज, माचिस, टोकरियां तथा घास, पत्तें तथा कच्चे धागे से बनी हुई वस्तुओं की प्रदर्शनी भी है।

सामाजिक वानिकी संग्रहालय

यह संग्रहालय वृक्षों सहित तथा वृक्षों के बिना पर्यावरण का गांवों की अर्थव्यवस्था तथा उत्पादकता पर प्रभाव को प्रदर्शित करता है। चित्र तथा प्रतिदर्श वृक्ष वृद्धि का ईंधन की लकड़ी, चारा तथा अन्य वन उत्पादों पर प्रभाव दिखाते हैं। प्रतिदर्श, रोपण भण्डार, रोपण तकनीकों तथा विभिन्न पादपों के लिए सुरक्षात्मक उपायो के लिए पौधशाला तकनीकों को दर्शाते है। उन्नत धुंआ रहित चूल्हों के प्रतिदर्श ईंधन की लकड़ी के सही उपयोग को प्रदर्शित करते हैं।

प्रदर्शित वस्तुएं सामाजिक वानिकी उत्पादों पर आधारित उपयुक्त कुटीर उद्योगों की स्थापना तथा विशेषकर भूमिहीन लोगों के लिए रोजगार उपलब्ध करवाने की संभावनाओं को प्रदर्शित करती है।

रोग विज्ञान संग्रहालय

वन रोग विज्ञान संग्रहालय विभिन्न व्यवसायिक रूप से महत्वपूर्ण वृक्ष रोगों तथा प्रकाष्ठ क्षय की 900 वस्तुओं को प्रदर्शित करता है। प्रदर्शनीय वस्तुओं को दो व्यापक मेजबान समूहों के आधार पर व्यवस्थित किया गया है ठोस लकड़ी तथा कानीफर। इसके पश्चात यह पादप के प्रभावित भागों के अनुसार विभाजित हो जाते है जैसे जड़ रोग, तना रोग तथा पर्ण रोग। महत्वपूर्ण वृक्ष रोग जैसे खैर, साल, टीक तथा देवदार में हृदय क्षय तथा खैर, साल तथा पाइन में जड़ क्षय प्रदर्शित किया गया है। सूक्ष्म जीवों द्वारा प्रकाष्ठ तथा प्रकाष्ठ उत्पादों का हास भी दर्शाया गया है।

फफूंद के माइर्क्रोजिया के रूप में लाभप्रद भूमिका विशेषकर पाइन में वृक्ष वृद्धि को बढ़ाना तथा स्थापित करने में तथा भोजन के स्रोत के रूप में फफूंद का महत्व भी दर्शाया गया है।

कीट विज्ञान संग्रहालय

 इस संग्रहालय में लगभग 3000 प्रदर्शित वस्तुएं नाशी कीटों की विभिन्न अवस्थाओं तथा बीजों, अंकुरों, खड़े वृक्षों, कटे हुए प्रकाष्ठ, बांस तथा तैयार उत्पादों को उनके द्वारा किए गए नुकसान की प्रकृति को प्रस्तुत कर रही है। प्रदर्शित वस्तुएं पादप वंशों के अनुसार वर्णानुक्रम से व्यवस्थित किया गया है। महत्वपूर्ण वानिकी नाशी कीट जैसे साल, अंतःकाष्ठ बेधक, सागौन निष्पत्रक, मेलियासीय प्ररोह बेधक, पापुलर निष्पत्रक, देवदार निष्पत्रक, शीशम निष्पत्रक, बबूल तना तथा जड़ बेधक, उनकी जीव विज्ञान, जीवन इतिहास तथा नुकसान की प्रकृति, उनको नियंत्रित करने की पद्धतियों सहित वर्णित है।

कुछ कीट नाशी तथा उनको उपयोग करने के लिए प्रयोग किए जाने वाले औजार भी प्रदर्शित किए गए है। दीमक का जीवन इतिहास तथा उन पर नियंत्रण की प्रदर्शनी एक शिक्षाप्रद संचय बनाता है। विभिन्न व्यापारिक प्रकाष्ठ को उनकी दीमक प्रतिरोधक क्षमता के अनुसार वर्गीकृत किया गया है।

 

अस्वीकरण ( डिस्क्लेमर): दिखाई गई सूचना को यथासंभव सही रखने के सभी प्रयास किए गए हैं। वेबसाइट पर उपलब्ध सूचना के अशुद्ध होने के कारण किसी भी व्यक्ति के किसी भी नुकसान के लिए भारतीय वानिकी अनुसन्धान एवं शिक्षा परिषद उत्तरदायी नहीं होगा। किसी भी विसंगति के पाए जाने पर head_it@icfre.org के संज्ञान में लाएं।