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भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद

(पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय, भारत सरकार )
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The President of India, Shri Pranab Mukherjee receiving the Report on ‘Health Status and Age Assessment of the Trees of Rashtrapati Bhavan’ from Dr. Savita, Director, Forest Research Institute, Dehradun at Rashtrapati Bhavan on the eve of demitting office as the 13th President of India on July 24, 2017

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वन उत्पादकता संस्थान, रांची

IFP Ranchi

सिक्किम तथा उत्तरी बंगाल में व्यापक तथा मनोहर पूर्वी हिमालय, बिहार तथा पश्चिम बंगाल में उपजाऊ जलोढ़ इंडो गंगैटिक मैदानों का फैलाव, विश्व विख्यात सुंदर वन के डैल्टा तथा तटीय मैनग्रोव, बिहार के उत्तर पश्चिमी किनारे में साल वन का एक छोटा सा क्षेत्र अपने अधिकार क्षेत्र में समृद्ध तथा मोहक प्राकृतिक संसाधनों की एक परत लिए हुए उष्णकटिबंधों पतझड़ी केमयूर तथा छोटा नागपुर के पठार के लिए वन उत्पादकता संस्थान एक मुख्य अनुसंधान संस्थान है जो पूर्वी भारत की वानिकी अनुसंधान की आवश्यकताओं को पूरा करती है।


निदेशक, वन उत्पादकता संस्थान, रांची का संदेश


डॉ. एस. ए. एन्सारी
, निदेशक

वन उत्पादकता संस्थान की शासकीय वेबपेज में आपका स्वागत करते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता है। संस्थान ने विभिन्न पणधारियों तथा उपभोक्ता एजेंसियों, गैर सरकारी संगठनों, अनुसंधान संस्थानों, बिहार राज्य, झारखण्ड, सिक्किम, पश्चिम बंगाल तथा बहुत से लोगों के कल्याण के लिए कई अनुसंधान तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम आरंभ किए हैं।


मुझे आशा है कि इस वेबपेज पर दी गई जानकारी दर्शकों के लिए अत्यंत उपयोगी होगी। वेबसाइट में सुधार के लिए सुझावों का स्वागत है।


बिहार, झारखण्ड, सिक्किम तथा पश्चिम बंगाल जो लगभग 46,581 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र को घेरता है जो कि देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 17% है को सम्मिलित करके संस्थान देश के पूर्वी राज्यों में वानिकी अनुसंधान तथा शिक्षा को संविन्यास, आयोजन, निर्देशन तथा प्रबंधन करने के लिए 1993 में अस्तित्व में आया। क्रियाशील क्षेत्र छः कृषि पारिस्थिकीय क्षेत्र तथा आठ मुख्य वन वर्ग को समाविष्ट करता है।

आईपीएफ के आपरेशन के प्रादेशिक क्षेत्र


 

उद्देश्य तथा मुख्य विषय :

संस्थान के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैः:

  • बिहार, झारखण्ड, सिक्किम तथा पश्चिम बंगाल राज्यों में वानिकी सेक्टर में अनुसंधान, विकास तथा विस्तार को परिचालित, प्रारंभ तथा समन्वित करना।

  • वनस्पति तथा प्राणीसमूह के संसाधनों की उत्पादकता को बढ़ावा, जैवविविधता संरक्षण, विकृत का पारिपुनरूद्धार।

  • क्षेत्र के लिए विशिष्ट भंगुर पारितंत्र की रक्षा।

  • वानिकी तथा संबद्ध विज्ञानों पर सूचना विकास तथा रखरखाव करना।

  • वनों तथा वन्यप्राणियों से संबंधित सामान्य सूचना तथा क्षेत्रीय विशेष अनुसंधान के लिए एक वितरण केंद्र के रूप में कार्यकरना।

  • कृषि वानिकी नमूनों का अनुसंधान तथा प्रदर्शन करना।

  • वन उत्पादकता को सुधारने के लिए मॉडल पौधशाला जननदृव्य बैंक की स्थापना करना तथा उपयुक्त बीज उत्पादन क्षेत्रों को पहचानना।

  • विस्तार कार्यक्रमों का विकास करना तथा अनुसंधान परिणामों को प्रयोगशाला से भूमि तक प्रचारित करना।

  • वानिकी अनुसंधान, प्रशिक्षण तथा संबद्ध विज्ञानों के क्षेत्र में परामर्शी सेवाएं उपलब्ध करवाना।

  • लाख रोपण का विकास तथा विस्तार करना तथा देश में लाख उत्पादन पर बाजार आंकड़ों का प्रचार करना।

  • उपर्युक्त क्रियाकलापों को पूरा करने के लिए संबंधित क्रियाकलापों जो आवश्यक हो को करना।

 अनुसंधान केंद्र

वन अनुसंधान केंद्र, मंदार, रांची

टिशू कल्चर, मृदा परीक्षण, जैव रसायन प्रयोगशालाओं, धुंध वाले चैम्बरों सहित आधुनिक पौधशाला तकनीकों, कृषि जाल छाया गृहों तथा कम्पोस्टिंग एकक, बीज प्रसंस्करण, पैकेजिंग तथा भण्डारण एकक, 24.32 हेक्टेयर क्षेत्र के रोपण प्रदर्शनीकरण तथा उद्रू/संतति परीक्षण के लिए विस्तृत प्रयोगात्मक क्षेत्र से सुसज्जित

पर्यावरणीय अनुसंधान स्टेशन, सुकना (पश्चिम बंगाल)

चयनित जलोत्सारण क्षेत्र में डाटा रिकार्डिंग के लिए पश्चिम बंगाल के दार्जलिंग जिले में सोनाडा तथा सुकना हाइड्रो वायुमंडलीय (मौसम संबंधी) रिकार्डिंग सुविधाओं तथा वेधशालाओं से सुसज्जित

तकनीकी सेवाएं


 तकनीकी सेवाएं

  • परामर्शी तथा प्रशिक्षण

  • मृदा परीक्षण
  • कीट तथा रोग नियंत्रण उपाय

  • वन विभागों को वृक्ष सुधार क्रियाकलापों पर अनुसंधान सहयोग

  • अनुश्रवण एवं मूल्यांकन

  • संसाधन संरक्षण

विस्तार

वानिकी विस्तार प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए अनुसंधान को अंत उपभोक्ता से जोड़ने में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। विस्तार अधीन क्रियाकलापों का लक्ष्य मुख्य रूप से लोगों को वनों की भूमिका तथा संरक्षण पर प्रेरित तथा शिक्षित करना, समूदायिक भूमि का विकास तथा प्रबंधन, लाख तथा औषधीय पौधों के वैज्ञानिक रोपण तथा वन उत्पादकता को बढ़ाने की आवश्यकता है। लक्ष्य समूहों द्वारा अंगीकार तथा परीक्षित तकनीकों के प्रचार के लिए आदर्श ग्राम तथा वन विज्ञान केंद्रों के स्थापन के लिए प्रयास किए गए हैं।

विकसित तकनीकें

  • बांस का वृहत फैलाव

  • महत्वपूर्ण प्रजातियों की सूक्ष्म फैलाव तकनीकें

  • मृदा प्रयोगशाला विश्लेषण तथा कमियों के लिए उपचार

  • लाख रोपण के लिए उन्नत तकनीक

  • कम्पोस्टिंग/वर्मी कम्पोस्टिंग द्वारा जैविक अपशिष्ट का पुनर्चक्रण

  • उच्च तकनीकी पौधशाला में रूट-ट्रेनरों का उपयोग करके गुणवत्ता रोपण सामग्री का उत्पादन

  • चयनित औषधीय पादपों की प्रसार तकनीकें

हाथ में ली गई परियोजानएं

पूरी की गई परियोजनाएं 2008-2009 2009-2010  -
जारी परियोजनाएं - - 2010-2011
नई प्रारंभ परियोजना  -  - 2010-2011
बाह्य सहायता प्राप्त      
नई प्रारंभ परियोजना 2008-2009 -  -
जारी परियोजनाएं  -  -  -
नई प्रारंभ परियोजना  -  -  -

 

नाम

पद दूरभाष-कार्यालय दूरभाष-निवास ई-मेल

डॉ. एस. ए. एन्सारी

निदेशक, वन उत्पादकता संस्थान, रांची

+91-651-2948505, 2948512, 2948515

+91-651 -

ifpranchi@hotmail.com dir_ifp@icfre.org

अधिक जानकारी के लिए :http://ifpranchi.co.in/

 

अस्वीकरण ( डिस्क्लेमर): दिखाई गई सूचना को यथासंभव सही रखने के सभी प्रयास किए गए हैं। वेबसाइट पर उपलब्ध सूचना के अशुद्ध होने के कारण किसी भी व्यक्ति के किसी भी नुकसान के लिए भारतीय वानिकी अनुसन्धान एवं शिक्षा परिषद उत्तरदायी नहीं होगा। किसी भी विसंगति के पाए जाने पर head_it@icfre.org के संज्ञान में लाएं।