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भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद

(पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय, भारत सरकार )
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The President of India, Shri Pranab Mukherjee receiving the Report on ‘Health Status and Age Assessment of the Trees of Rashtrapati Bhavan’ from Dr. Savita, Director, Forest Research Institute, Dehradun at Rashtrapati Bhavan on the eve of demitting office as the 13th President of India on July 24, 2017

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   सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्न


1. रेजिन के लिए वानिकी प्रजातियों के आनुवंशिक रूप से श्रेष्ठतर बीजों को कैसे प्राप्त किया जा सकता है?
  वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान पहले आओ पहले पाओ आधार पर प्रतिवर्ष यूकेलिप्टस, कैज्वारिना तथा एकेशिया के श्रेष्ठतर बीजों की सीमित मात्रा में आपूर्ति करता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया निदेशक से संपर्क करें।
 
2. क्या मैं जान सकता हूँ कि उत्पादकता बढ़ाने के लिए किस प्रकार की रोपण सामग्री प्रयोग करनी चाहिए?
  आम तौर पर कृंतक उत्पादकता बढ़ाने में बीज सामग्री से अधिक उपयोगी होते हैं।
 
3. क्या मैं यह राय ले सकूँगा कि मैं अपनी भूमि में किस प्रकार के वृक्ष लगाऊँ तथा उनको कैसे विकसित करूँ?
  हां, अपनी भूमि की सविस्तार जानकारी के साथ निदेशक से संपर्क करें।
 
4. बागानों में पुष्पण कम है इसमें कैसे सुधार लाया जा सकता है?
  पैक्लोबुटराजोल का प्रयोग पुष्पण को बढ़ाता है।
 
5. इमली बागों के लिए सर्वोत्कृट कृंतक संयोजन कौन सा है। यह उपज पैटर्न पर कैसे प्रभाव डालता है?
  पैक्लोबुटराजोल का प्रयोग पुष्पण को बढ़ाता है।
 
6. यूकेलिप्टस को आनुवंशिक संशोधन अध्ययन के लिए लक्ष्य क्यों बनाया गया है?
  लुग्दी तथा रेयान उद्योग में यूकेलिप्टस को कच्चे माल की भाँति उपयोग किया जाता है तथा यह बंजर भूमि में भी उगाया जाता है। यूकेलिप्टस की खेती भारत में अनुमानित तौर पर 25,00,000 हे. क्षेत्र में की जाती है। इसके अतिरिक्त यूकेलिप्टस एक प्रवर्तित प्रजातियां है तथा भारत में यूकेलिप्टस की कोई प्राकृतिक जनसंख्या नहीं है अतः ट्रांसजीन पर चिंता कम हो गई है। यूकेलिप्टस पात्रे पुनर्जनन में भी उतना ही सहजगामी है जितना कि सूक्ष्म प्रवर्धन में। अतः यह आनुवंशिक रूप से सुधरे हुए वृक्षों के आसान प्रवर्धन में सहायता करता है। संस्थान के पास यूकेलिप्टस सुधार के लिए एक कार्यक्रम जारी है। सर्वोत्तम जीनोप्ररूप बीज बागानों तथा रोपण कार्यक्रमों के लिए चुने गए है।
 
7. आनुवंशिक सुधार के लिए कौन-कौन सी विशेषताओं को लक्ष्य माना गया है?
  वर्तमान में ओस्मोटीन जीन रूप परिवर्तन प्राटोकाल के विकास के लिए प्रयोग किया जा रहा है। ओस्मोटीन जीन नमक तनाव तथा बीमारियों के प्रति सहनशीलता को बढ़ाता है, ऐसा रिपोर्ट किया गया है। यूकेलिप्टस कागज तथा लुग्दी उद्योग के कच्चे माल के रूप में प्रयोग किया जाता है। लाइनिन तथा सैलुलोज रूपरेखा के आनुवंशिक सुधार का प्रयास एक बार किया गया है। यूकेलिप्टस का सुचारू रूपांतरण किया जा चुका है।
 
8.  जनसंख्या के विभिन्न स्तरों के विश्लेषण के लिए एक उपयुक्त डी एन ए मार्कर (चिन्हक) का चयन कैसे किया जाता है?
  कैज्वारिना तथा यूकेलिप्टस पर हमारे अध्ययन से हमने पाया कि प्रमुख चिन्हक जैसे आई एस एस आर तथा आर ए पी डी प्रजातियों के स्तर विभेदीकरण के लिए प्रयोग किए जा सकते है जबकि एफ आई एस एस आर, ए एफ एल पी तथा एस एस आर प्रोविनेन्सिस तथा कृंतकों सहित उप टाक्सा विशिष्ट के लिए उपयुक्त पाए गए।
 
9. आण्विक आकड़ों का प्रयोग करके आनुवंशिक विविधता आकलन में कौन से साफ्टवेयरों का प्रयोग किया जाता है?
  डी एन ए मार्कर आकड़ा (प्रधान एवं सह प्रधान) का प्रयोग करके एन टी एस वाई एस, पी ओ पी जी ई एन ई, डब्ल्यू आई एन बी ओ ओ टी, आरलीक्यून तथा डी एन ए पी ओ पी सहित साफ्टवेयर आनुवंशिक विविधता आंकलन के लिए प्रयोग किए जाते हैं।
 
10. बिना अनुक्रम जानकारी के साथ प्रजातियों में एस एस आर एस कैसे विकसित किए जा सकते हैं? क्या एस एस आर समृद्धि के लिए कोई अन्य रणनीति भी उपलब्ध है?
  एक नई प्रजाति के लिए माइक्रोसैटेलाइट चिन्हक तंत्र विकसित करने के लिए विलगन, प्रतिरूपण, अनुक्रमण तथा माइक्रोसैटेलाइट के लक्षण वर्णन की आवश्यकता होती है। जिनोमिक लाइब्रेरी में माइक्रोसैटेलाइट की समृद्धि के लिए कई विधियां है जैसे स्थिरक पुनरावृत्ति प्रारंभक अथवा सलाई से माइक्रोसैटेलाइट विलगन की क्षमता को बढ़ाना। प्रयोगशाला आधारित एस एस आर पुस्तकालयों का अनुवीक्षण द्वारा माइक्रोसैटलाइट चिन्हकों का विकास समय की खपत करने वाला तथा महंगा है एक वैकल्पिक रणनीति यह है कि प्रजातियों अथवा वंशों के बीच एस एस आर क्रास करवाया जाए तदुपरांत समृद्ध पुस्तकालय का निर्माण तथा प्राइमरों का अनुवर्ती अनुक्रमण तथा विकास हो। यह रणनीति कैज्वारिना इक्वासोटीफोलिया में एस एस आर एस विकसित करने के लिए प्रयोग की जाती है।
 
11. विभिन्न यूकेलिप्टस प्रजातियों को पहचानने के लिए क्या कोई विशेष डी एन ए चिन्हक है?
 

हमने ई-कैमलडयूलीनसिस, ई-ग्रान्डिस, ई-यूरोफाइलिया तथा ई-सिटरियोडोरा के लिए प्रजाति-विशिष्ट आई एस एस मार्कर विकसित किए है जबकि ई-टैरीटीकारनिस के लिए कोई विशेष चिन्हक नहीं खोजा गया है हांलाकि ई- टैरिटीकार्निस के लिए विशिष्ट एस एस आर चिन्हक की पहचान का कार्य प्रगति पर है।
 

12. क्यू टी एल प्रतिचित्रण पर संयोजन प्रतिचित्रण के क्या लाभ हैं?
  सहयोजन प्रतिचित्रण एक आधुनिक सिद्धांत है जो फिनोटाइप में प्रयोग किया जाता है। सहलग्न असंतुलन पर आधारित चिन्हक संयोजन प्राकृतिक जनसंख्या में होता है जबकि क्यू टी एल प्रतिचित्रण चिन्हक संयोजन के साथ अलग-थलग आबादी में होता है। वृक्ष प्रजातियों में एक लम्बे गर्भकाल के साथ, विरोधी जीनोटाइप सहित अलग-अलग आबादियों का प्रजनन समय लेने वाला होता है। अतः कैन्डीडेट जीनों पर सहयोजन प्रतिचित्रण एक वैकल्पिक साधन हो सकता है जहां जहां एक असंगठित जनसंख्या का प्रयोग किया जा सकता है। यहां चिन्हक कैन्डिडेड जीन के बहुत समीप है (किलोवेसपेयर में) अथवा कैन्डिडेड जीन में एस एन पी वैद्यता के लिए अलग-अलग आबादियों के पुनर्जनन को कम कर रहा है।
13. वे बांस प्रजातियां जिनके लिए उत्तक संवर्धन प्रोटोकाल विकसित किया गया है?
  हमने डैन्ड्रोकैलामस स्ट्रीक्टस, बैम्बूसा अरूनडीनैसिया तथा आक्सीटेनआन्थेरा स्टाक्सी के लिए पहले ही उत्तक संवर्धन प्रोटोकाल विकसित किया है जबकि अन्य बांस प्रजातियां जैसे बैम्बूसा न्यूटैन्स तथा डैन्ड्रोकैलामस गिगैन्टियस के लिए प्रोटोकाल विकसित किया जा रहा है।
 
14. बांस के पात्रे बहुलीकरण के लिए कौन सी मूल्य न्यूनीकरण रणनीतियां अपनाई जाती है?
  मूल्य न्यूनीकरण के लिए तरल माध्यम, सुक्रोज के स्थान पर व्यापारिक रूप से उपलब्ध चीनी तथा सूक्ष्म प्ररोह के एक्स विटरो रूटिंग पद्धतियां हैं।
 
15. क्या बांस में कोई कायिक भ्रूणोद्भव प्रोटोकाल उपलब्ध है?
  हां, डी. स्ट्रिकटस में कायिक भ्रूणोद्भव प्रोटोकाल पाया गया है। इस सविस्तार जानकारी पत्र - ”बांस में कायिक एमब्रयोजिनीसिस प्रोटोकाल को बढ़ाने तथा पादप पुनर्जनन (डैन्ड्रोकैलामस स्ट्रिक्टस )” में पाई जा सकती है। प्लान्ट सेल बॉयोटेक्नोलोजी एण्ड मोलिक्यूलर बाइलोजी 2003.4 (1 तथा 2) : 9-16
 
16. क्या आप संकर कृंतकों के सूक्ष्म प्रवर्धन पर काम कर रहे हैं?
  हमने यूकेलिप्टस टैरीलियाना एक्स-ई-सिट्रीयोडोरा के कल्पित संकर के सहायक कली प्रचुरोद्भव के बारे में सूचित किया है। यह पादप वानस्पतिक कतरन के द्वारा अग्रेतर बहुलीकरण के लिए तमिलनाडु वन विभाग को सप्लाई किए जाते हैं।
 
17. क्या टिशू कल्चर पौधे खेत में उनके प्रदर्शन के लिए मूल्यांकित किए जाते है?
  हम वर्तमान में बांस के टिशु कल्चर द्वारा उत्पन्न किए गए पादपों का क्षेत्र परीक्षण कर रहे हैं तथा उनकी वृद्धि प्रदर्शन का अंकुरों तथा वानस्पतिक रूप से प्रवर्धित सामग्री से तुलना कर रहे हैं।
 
18. बीज परीक्षण प्रयोगशाला में कौन-कौन से परीक्षण किए गए हैं?
  बीज अंकुरण परीक्षण, सामर्थ्य परीक्षण, शुद्धता विश्लेषण।
 
19. मैं औषधीय पादपों की खेती करना चाहता हूँ? इसके लिए मुझे बाजार कहाँ मिलेगा? कृपया मार्गदर्शन करें।
  हम बीज संचालन पद्धतियों तथा चयनित औषधीय पादपों के अंकुरों को उगाने में सहायता कर सकते हैं परंतु हम विपणन कार्य नहीं करते है। हमारा सुझाव है कि आप कृपया आयुर्वेधिक औषधी उत्पादकों जैसे कोटाककाल वैद्यशाला, औषधी, फार्मायूटिकल उद्योगों अथवा सहकारी सोसायटियों जो केरल तथा कर्नाटक में काम कर रही हैं, से इस उद्देश्य के लिए संपर्क कर सकते हैं।
 
20. क्या वन बीजों, पौधशालाओं तथा रोपण की कीट तथा रोग समस्याओं के निदान के लिए कोई सेवा उपलब्ध है?
  वन पौधशालाओं तथा रोपण कीटों तथा रोगों के निदान के लिए विशेषज्ञता उपलब्ध है।
21. क्या वानिकी की कीट प्रबंधन तथा रोग समस्याओं के प्रबंधन की पद्धतियां उपलब्ध है?
  विशिष्ट वानिकी वृक्ष प्रजातियों जैसे सागौन, कैज्वारिना, एकेशिया, एल्बीजिया, इमली, यूकेलिप्टस और नीम के प्रमुख कीटों तथा रोग समस्याओं के प्रबंधन की पद्धतियां उपलब्ध है।
 
22. वानिकी प्रजातियों के कीट तथा रोग प्रबंधन की परीक्षित पर्यावरण मित्र पद्धतियां कौन सी हैं?
  विभिन्न पादप उत्पादों तथा सूक्ष्म जैविक एजेंटों का बीजों, पौधशालाओं तथा व्यापारिक रूप से महत्वपूर्ण प्रजातियों जैसे सागौन, कैज्वारिना, एकेशिया, एल्बीजिया, इमली, यूकेलिप्टस के प्रबंधन के लिए मूल्यांकन किया गया है तथा उसे मानकीकृत किया गया।
 
23. क्या जैवउर्वरकों पर विशेषज्ञता उपलब्ध है?
  वृक्ष प्रजातियों विशिष्ट एक्टो तथा एण्डो माईकोरइजल जैवउर्वरकों के अलगाव, पहचान तथा वृहत उत्पादन के लिए विशेषज्ञता उपलब्ध है।
 
24. क्या पादपालय में पहचान के लिए सेवा उपलब्ध है?
  हां, दक्षिणी भारत की वन पादप प्रजातियों की पहचान उपलब्ध कराने का उत्तरदायित्व भा.वा.अ.शि.प. की दरों के अनुसार शुल्क देने पर है। प्रत्येक पादप नमूना प्रजातियों के वर्गीकी पहचान के लिए उसके प्रकृति, आवास तथा फलों तथा फलों के गुण तथा अन्य संबंधित जानकारियां टिप्पणी सहित होती हैं।
 

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