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भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद

(पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय, भारत सरकार )
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The President of India, Shri Pranab Mukherjee receiving the Report on ‘Health Status and Age Assessment of the Trees of Rashtrapati Bhavan’ from Dr. Savita, Director, Forest Research Institute, Dehradun at Rashtrapati Bhavan on the eve of demitting office as the 13th President of India on July 24, 2017

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प्रभाग के क्रियाकलाप तथा नई शुरूआतें इस प्रकार हैं:

 

बाहय निधिकृत परियोजनायें

 

प्रभाग ने भा.वा.अ.शि.प. के संस्थानों/केन्द्रों के लिए बाहय दाता निकायों (राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय) की पहचान की तथा दबाव क्षेत्र, दिशा-निर्देश, फाॅर्मेट आदि पर संबन्धित सूचना उपलब्ध कराई।

मुख्य दाता निकाय हैं: पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (एम.ओ.ई.एफ), जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डी.बी.टी.), विज्ञान एवं तकनीकी विभाग (डी.एस.टी.), राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एन.एम.पी.बी.), कृषि एवं ग्रामीण विकास राष्ट्रीय बैंक (एन.ए.बी.ए.आर.डी.), रास्ट्रीय तिलहन एवं वनस्पतिक तेल विकास बोर्ड (एन.ओ.वी.ओ.डी.), विज्ञान एवं औद्योगिक तथा अनुसन्धान परिषद् (सी.एस.आई.आर.), राष्ट्रीय बांस अनुप्रयोग मिशन (एन.एम.बी.ए.) आदि।

मुख्य अन्तर्राष्ट्रीय दाता निकाय है: अन्तर्राष्ट्रीय विज्ञान संघ (आई.एफ.एस.), जापान अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग निकाय (जे.आई.सी.ए.), अन्तर्राष्ट्री उष्णकटिबन्धी प्रकाष्ठ संगठन (आई.टी.टी.ओ.), संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफ.ए.ओ.), सांझाबजार वैज्ञानिक एवं औद्योगिकी अनुसन्धा संगठन (सी.एस.आई.आर.ओ.), अन्तर्राष्ट्रीय विकास कार्यक्रम (यू.एन.डी.पी.) आदि।

प्रभाग द्वारा भा.वा.अ.शि.प. संस्थानों/केन्द्रों की अनुसन्धान परियोजनाओं के लिए बाहय निधिकरण का प्रयास किया जा रहा है। वर्तमान में राष्ट्रीय दाता निकायों द्वारा 123 परियोजनाओं के लिए 39-20 करोड़ रूपये स्वीकृत किये गये हैं और अन्तर्राष्ट्रीय दाता निकायों द्वारा 5.15 करोड़ की नौ परियोजनायें स्वीकृति हैं, जिन्हें भा.वा.अ.शि.प. के आठ संस्थानों और चार केन्द्रों में क्रियान्वित किया जा रहा है। इसके अलावा राष्ट्रीयदाता निकायों द्वारा 30 तथा अन्तर्राष्ट्रीय निकायों द्वारा 5 परियोजनाओं को निधिकृत करने की प्रक्रिया जारी है।

अखिल भारतीय संयोजित परियोजनायें 

 

      प्रभाग ने 17 अखिल भारतीय संयोजित परियोजनाओं को अन्तिम रूप देने हेतु भा.वा.अ.शि.प. के संस्थानों को सहयोग दिया जिसका आंकलित बजट 115.62 रूपये है। जिसके तहत कई मुख्य प्रजातियां शामिल हैं। जैसे जेट्रोफा, पाॅपलर, कैज्यूरियाना, शीशम, बांस आदि। साथ ही वानिकी से सम्बन्धित समस्याओं का भी ध्यान रखा गया है जैसे यूकेलिप्टस गाल वेस्प का जीवविज्ञानी नियंत्रण, आनुवंशीय सुधार तथा वृक्ष सुधार रणनीतियां, जलाऊ काष्ठ उपयोजन आदि। डी.पी.आर को संकलित किया गया और योजना आयोग द्वारा निधिकरण के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के प्रस्तुत किया गया।

 

 

बिहार परियोजना

प्रभाग द्वारा बिहार की व्यापक परियोजना के निष्पादन में संयोजन किया जा रहा है। इस परियोजन का नाम है “समुदाय आधारित वन प्रबन्धन एवं संरक्षण योजना बिहार राज्य” इस का क्रियान्वयन भा.वा.अ.शि.प. द्वारा पर्यावरण एवं वन विभाग, बिहार राज्य द्वारा किया जा रहा है। वर्तमान में योजना आयोग द्वारा परियोजन का प्रथम फेज रू. 851.00 करोड अनुमोदित किया गया है। इसमे भा.वा.अ.शि.प. का भाग रू. 18.90 करोड़ और बिहार वन विभाग का भाग रू. 32.06 करोड रूपये है जिसे क्रियान्वित किया जा रहा है। फेज-प् के तहत भा.वा.अ.शि.प. द्वारा उत्तरी बिहार के वैशाली जिले में कृषि वानिकी कार्यक्रम पर आधारित पाॅपलर पर कार्य किया जा रहा है, जिसके लिए तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है, प्रशिक्षण और विस्तार, स्तरीय रोपण स्टाॅफ उगाना, आधुनिक/उच्च तकनीकी पौधशालाओं की स्थापना करना, किसान पौधशालायें बनाना, प्रदर्शन भू-खण्ड और कृन्तकीय बीज उद्यान स्थापित किये जा रहे हैं। कार्यक्षेत्रीय दौरों और समीक्षा बैठकों के जरिये, प्रभाग द्वारा कृषि वानिकी घटक के अन्तर्गत विभिन्न क्रियाकलापों की प्रगति को माॅनीटर किया जाता है।

विविध परियोजनायें

प्रभाग द्वारा उपयुक्त निधिकरण निकायों से निधि प्राप्त करने हेतु मंत्रालय को “गरीबी उन्मूलन हेतु वानिकी अनुसन्धा सहायता” पर रू. 566 करोड़ तथा “गरीबी उन्मूलन के लिए समुदाय आधारित सतत् प्राकृतिक संसाधन प्रबन्धन” पर रू. 1000 करोड हेतु परियोजना अवधारणा नोट प्रस्तुत किया गया है।

प्रकाशन

 

  • डाॅ. रीता धवन, वैज्ञानिक-एफ (पी.एफ.) द्वारा एक अनुसन्धान प्रलेख “वैश्विक जलवायु परिवर्तन तथा कार्बन सिंक के रूप में वनों की भूमिका” तथा श्री मुदित कुमार सिंह, सहायक महानिदेशक (पी.एफ.), भा.वा.अ.शि.प. द्वारा इन्विस-वानिकी बुलेटिन: भाग 3 प्रकाशित किया गया दिसम्बर 2003 पी.पी. 36-39

  • अनुसन्धानकर्ताओं को उपयुक्त परियोजना विकसित करने में सहायता देने हेतु सिंह, मुदित कुमार, धवन, रीता तथा चैहान, जयश्री आरडे द्वारा विभिन्न संगठनों और वेब साईटों से सूचना एकत्र करके परियोजना निधिकरण के लिए दाता निकाय का सार-संग्रह न. 118, भा.वा.अ.शि.प. बी.एल. -21, 2006 पी.पी. 1-239 का प्रकाशन किया गया। इसमे 32 अन्तर्राष्ट्रीय और 20 राष्ट्रीय दाता निकायों के मुख्य क्षेत्रों, फाॅर्मेटस, कंटेक के पत्ते दिये गये हैं।

कार्यशालायें

 

 

  • “संयुक्त वन प्रबन्धन के दस वर्ष-पश्च दर्शन तथा आत्म विश्लेषण” पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन, विज्ञान भावन, नई दिल्ली में 19-29 जून 2000 को किया गया।
  • भारतीय अन्तर्राष्ट्रीय केन्द्र, नई दिल्ली में 23-24 सितम्बर 2002 को “वानिकी एवं जलवायु परिवर्तन - आकलन, न्यूनीकरण क्षमता और लागत” पर अन्तर्राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

  • “संयुक्त वन प्रबन्धन में अनुप्रयोग के लिए प्रौद्योगिकीय परिवर्तन तथा अनुसन्धान उच्चीकरण” पर 4-5 फरवरी 2003 को भा.वा.अ.शि.प. (मुखालय) में राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

  • वन विज्ञान भवन, नई दिल्ली में 15-16 नवम्बर 2005 को “वनों का इतिहास - 1947 के बाद” लेखकों की कार्यशाला का आयोजन किया गया।

  • प्रभाग द्वारा भा.वा.अ.शि.प.-व.अ.सं. में 18 से 21 अप्रैल 2006 तक आयोजित ”एशिया प्रशान्त वानिकी आयोग की बैठक” के आयोजन में समन्वय किया गया।

  • वन विज्ञान भवन, नई दिल्ली में 17 मार्च 2009 को “दस राज्यों में गरीबी उन्मूलन हेतु समुदाय आधारित सतत् प्राकृतिक संसाधन प्रबन्धन” पर कार्यशाला।

 

इसके अलावा व.अ.सं., देहरादून में (29-31 जनवरी 2004) तक “कम ज्ञात वृक्ष प्रजातियों” पर कार्यशाला आयोजन हेतु निधि का प्रबन्ध किया गया। साथ ही का.वि.प्रौ.सं., बैंगलोर में 18-22 फरवरी 2004 तक कच्छ वनस्पति तथा 27-28 मई 2004 को व.आ.वृ.प्र.सं., कोयम्बटूर में पवित्र उपवन पर कार्यशाला आयोजन हेतु फंडस की व्यवस्था की।

 

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