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भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद

(पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय, भारत सरकार )
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The President of India, Shri Pranab Mukherjee receiving the Report on ‘Health Status and Age Assessment of the Trees of Rashtrapati Bhavan’ from Dr. Savita, Director, Forest Research Institute, Dehradun at Rashtrapati Bhavan on the eve of demitting office as the 13th President of India on July 24, 2017

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मीडिया और विस्तार विभाग

  • परिषद तथा इसके संस्थानों द्वारा विकसित विभिन्न प्रौधोगिकियों को किसानों तथा वन आधारित उधोगों सहित राज्य वन विभागों (एस.एफ.डी.) से उपभोक्ता समूह तक प्रचारित करने के लिए ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के अधीन प्रत्येक राज्यकेन्द्र शासित राज्यों में वन विज्ञान केन्द्र की स्थापना।

  • भा.वा.अ.शि.प. के संस्थानों द्वारा ग्रामों का अंगीकरण तथा कम मूल्यवाली हाईटेक आदर्श पौधशाला की सैटिंग ताकि नवीनतम खोजों को दिखाया जा सके तथा लक्षित समूहों तक प्रौधोगिकियों का हस्तांतरण।

  • वानिकी अनुसन्धान के क्षेत्रों में राष्ट्रीय महत्व को सुरक्षित करने के लिए एक समिति गठित की गई ताकि खोजी गई प्रौधोगिकियों तथा भा.वा.अ.शि.प. के संस्थानों द्वारा उत्पन्न की गई बौद्धक सम्पति के लिए बौद्धिक सम्पति नीति विकसित की जा सके।

"पर्यावरण प्रबन्धन प्रभाग

पर्यावरणीय परामर्शी सेवाएंnew

पूरे किये गये अध्ययन

  • कृष्णा गोदावरी बेसिन (के.जी.-ओ.एन.-1) भूकम्पीय आपरेशनों का पर्यावरणीय प्रबन्धन (ई.एम.)

          परियोजना प्रस्तावक: रिलायन्स इंडस्ट्रीज लि. मुम्बई

  • त्रिरुपति से तिरुमला तक के रोपवे के निर्माण तथा कार्य का तीव्र पर्यावरण प्रबन्धन आंकलन

          परियोजना प्रस्तावक : आन्ध्रप्रदेश पर्यटन विकास कारपोरेशन हैदराबाद, आन्ध्र प्रदेश

  • वनस्पति तथा वन्य जीव पर खदान लीज क्षेत्र, कोथागुडेम के ए.सी.सी.एल. में तेला-वागु-नल्लाह, के पुर्नसंयोजन के लिए आरिक्षित वन के विचलन के साथ संभावित परिवर्तनों का मूल्यांकन।

           वनस्पति तथा वन्य जीव पर खदान लीज क्षेत्र, कोथागुडेम के ए.सी.सी.एल. में तेला-वागु-नल्लाह, के पुर्नसंयोजन के लिए आरिक्षित वन के विचलन के साथ संभावित परिवर्तनों का मूल्यांकन।

  • कुदेरमुख लौह अयस्क खदानों के लिए अनितम खदान क्लोजर योजना की तैयारी

          परियोजना प्रस्तावक : कुदेरमुख लौह अयस्क कम्पनी लि. बैंगलौर

  • बोधघाट जल विधुत परियोजना का परियोजना प्रभाव आकलन, गणना, पारिसिथतकीय जैवविविधता मूल्य, जीनपूल अध्ययन का नुकसान, परियोजना से प्रभावित लोगों की आवश्यकता का पुन आकलन तथा पर्यावरणीय प्रभाव आकलन

          परियोजना प्रस्तावक: छत्तीसगढ़, राज्य बिजली बोर्ड, रायपुर छत्तीसगढ़

  • तपोवन विष्णुगढ़ जल शाकित परियोजना, जोशीमठ, जिला चमोली, के लिए एन.टी.पी.सी. - सामाजिक आर्थिक अध्ययन (एस.ई.एस.)

          परियोजना प्रस्तावक: राष्ट्रीय जल विधुत कार्पोरेशन (एन.टी.पी.सी) जोशीमठ

  • मध्य भारत के अतिरिक्त सारे देश में विभिन्न एजेंसियों को प्रोत्साहक तथा व्यापारिक तथा संविदा योजनाओं के अधीन, राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड, आयुष विभाग द्वारा निधियीत परियोजनाओं का अनुश्रवण एवं मूल्यांकन

          परियोजना प्रस्तावक : राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एन.एम.पी.वी.) आयुष, स्वास्थय तथा परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार

  • चंढ़ीगढ़ औधोगिक क्षेत्र फेज प्प्प् का तीव्र पर्यावरण प्रभाव आकलन

         परियोजना प्रस्ताव : चण्डीगढ़ प्रशासन, चण्डीगढ़

  • कोटलीबहेल जल विधुत परियोजना फेज प्प् के लिए ई.आई.ए. अध्ययन तथा पर्यावरणीय प्रबन्धन योजना (ई.एम.पी.) का संविन्यास

          परियोजना प्रस्तावक : राष्ट्रीय जलविधुत कार्पोरेशन लि. टिहरीपौडी गढ़वाल

  • तालकटोरा इन्डोर स्टेडियम के उन्नयन के लिए तीव्र पर्यावरण प्रभाव आकलन

          परियोजना प्रस्तावक : नई दिल्ली नगर निगम कार्पोरेशन, नई दिल्ली

 

नवीन प्रयास:

  • आन्ध्र प्रदेश मिनरल विकास कार्पोरेशन लि. के लिए विशाखापटनम, गाली कोडा रोथाकोण्डा तथा चिटमगोंडी में बक्साइट डिपोजिटो के शोषण के लिए पर्यावरण प्रभाव आकलन, सामाजिक-आर्थिक तथा पारिसिथतकीय अध्ययन

        परियोजना प्रस्तावक : आन्ध्रप्रदेश मिनरल विकास कार्पोरेशन लि. (ए.पी.एम.डी.सी.) हैदराबाद

  • आन्ध्र प्रदेश मिनरल विकास कार्पोरेशन लिमिटेड के लिए गोलाई कोंडा, रक्थाकोड तथा चिटमगोंडी में बाक्साइट खनन के लिए जलभराव क्षेत्र उपचार योजना।

          परियोजना प्रस्तावक : आन्ध्र प्रदेश मिनरल विकास कार्पोरेशन लि. (ए.पी.एम.डी.सी.), हैदराबाद।

  • विशाखापटनम में जारीला समूह में बाक्साइट खनन के लिए वन भूमि को मोड़ने के लिए पर्यावरण प्रभाव आकलन तथा पर्यावरण प्रबन्धन योजना

          परियोजना प्रस्तावक : आन्ध्र प्रदेश मिनरल विकास कारपोरेशन लि. (ए.पी.एम.डी.सी.) हैदराबाद

  • हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में रेनुका बांध परियोजना के लिए पर्यावरण प्रभाव आकलन अध्ययन तथा पर्यावरण प्रबन्धन योजना का संविन्यास

          परियोजना प्रस्तावक : हिमाचल प्रदेश पावर कार्पोरेशन लि. शिमला

  • टिहरी बांध जल विधुत परियोजना के जलभराव क्षेत्र उपचार योजना का मूल्यांकन

          परियोजना प्रस्ताव : पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, नई दिल्ली

  • राष्ट्रीय वनीकरण तथा पारि विकास बोर्ड द्वारा कार्यानिवत राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम का मध्यावधि मूल्यांकन

          परियोजना प्रस्तावक : पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, नई दिल्ली

  • विशाखपटनम के जारीला ब्लाक में बाक्साइट की शोषण के लिए मृदा अपदन को रोकने के लिए सूक्ष्म योजना तथा उपयुक्त एस.एम.सी. कार्यों के स्थापन्न सहित विस्तृत जलभराव क्षेत्र उपचार योजना की तैयारी (सी.ए.टी.पी.) हैदराबाद

          परियोजना प्रस्तावक : आन्ध्र प्रदेश मिनरल विकास कारपोरेशन लि. (ए.पी.एम.डी.सी.) हैदराबाद

  • पर्यावरण प्रभाव आकलन तथा जलभराव क्षेत्र उपचार योजना, झारखण्ड में अंकुआ लौह अयस्क डिपोजिटो के लिए जलविधुत तथा निकासी अध्ययन

           परियोजन प्रस्तावक: जे.एस.डब्ल्यू. स्टील लि. मुम्बई

  • कुटेहर जल विधुत परियोजना (के.एच.ई.पी.) (260 मैगावाट) जिला चम्बा, हिमाचल प्रदेश के लिए ई.आई.ए. तथा ई.एम.पी. रिपोर्ट की तैयारी

          परियोजना प्रस्तावक : जे.एस.डब्ल्यू. एनर्जी लि. मुम्बई

  • हिमाचल प्रदेश में समेकित कशांग जलविधुत परियोजना (243) मैगावाट के लिए पर्यावरण प्रभाव आकलन अध्ययन तथा पर्यावरण प्रबन्धन योजना का सूत्रीकरण

          परियोजना प्रस्तावक: हिमाचल प्रदेश पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (एच.पी.सी.एल.) शिमला

  • उत्तराखण्ड जिला उत्तरकाशी में 600 (4 ग् 150) मैगावाट लोहारीनाग पाला जल विधुत परियोजना (एन.टी.पी.सी) के संदर्भ में जलभराव क्षेत्र उपचार का मूल्यांकन (सी.ए.टी.) किया गया।

          परियोजना प्रस्तावक : राष्ट्रीय थर्मल पावर कार्पोरेशन (एन.टी.पी.सी.)

 

धारणीय भूमि एवं पारितंत्र प्रबन्धन (स्लेम)

“भारत में धारणीय भू एवं पारितंत्र को मुख्यधारा में लाने तथा उन्नयन के लिए नीति संस्थागत सुधार धारणीय भूमि तथा पारितंत्र प्रबन्धन ”.

सांझेदारी कार्यक्रम (स्लेम-सी.पी.पी.) पर्यावरण एवं वन प्रबन्धन, भारत सरकार तथा विश्व पर्यावरण सुविधा ( जी.ई.एफ.) का एक संयुक्त प्रयास है तथा इसमें सात परियोजनाएं है जो यू.एन.डी.पी., एफ.ए.ओ, तथा विश्व बैंक के सहयोग से भारत के दस राज्यों में कार्यानिवत की गई है। स्लेम कार्यक्रम को तकनीकी सहयोग भा.वा.अ.शि.प. में स्थापित तकनीकी सुविधा संस्था (टी.एफ.ओ.) के द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही है। भा.वा.अ.शि.प. में टी.एफ.ओ. को विश्व बैंक के संरक्षण वाली मध्यम स्केल परियोजना (एम.एस.पी.) विषय Þभारत में धारणीय भू तथा पारितंत्र प्रबन्धन को मुख्य धारा में लाने के लिए नीति तथा संस्थात्मक सुधार के द्वारा संस्थापित किया गया। देश के विभिन्न भागों में सिथत स्लेम परियोजनाओं को जब कभी भी आवश्यकता हुई, भा.वा.अ.शि.प. मुख्यालय तथा इसके विभिन्न अनुसन्धान संस्थानों ने वांछित तकनीकी सहयोग उपलब्ध करवाया। भा.वा.अ.शि.प. में स्लेम परियोजना कार्यान्वयन एकक है जिसकी भा.वा.अ.शि.प. मुख्यालय में विस्तार निदेशालय के अधीन एक परियोजना निदेशक द्वारा अध्यक्षता की जाती है स्लेम परियोजना का पूर्ण उददेश्य प्राकृतिक संसाधन उपयोग की बढ़ी हुई क्षमता को प्रोत्साहित करके, भू तथा पारितंत्र उत्पादकता को बढ़ाकर तथा मौसमीय घटनाओं जिसमें जलवायु परिवर्तन भी सम्मलित है, के प्रति संवेदनशीलता को घटा कर भारत में गरीबी उन्मूलन में सहायता करना है। स्लेम सहभागिता सर्वोत्तम पद्धतियोंसीखे गये अनुभवों तथा भारत में स्लेम उपागम को उन्नयन करने के लिए नीति अनुशंसाए उपलब्ध करवा कर विभिन्न स्लेम सहभागियों के मध्य सहक्रिया उत्पन्न करने का प्रयास करता है। परियोजना स्थल, शुष्क, तटीय तथा पहाडी पारितंत्र सहित विभिन्न पारितंत्रीय क्षेत्रों को कवर करता है तथा तटीय कृषि, झूम खेती, जलसंभरण प्रबन्धन तथा भू जल प्रबन्धन सहित भू तथा पारितंत्र प्रबन्धन के विभिन्न पहलुओं को सुलझाता है । राज्य जहां स्लेम-सी.पी.पी. वर्तमान में जारी है वे राज्य है उत्तराखण्ड, नागलैंड, आन्ध्र प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पशिचम बंगाल, उडीसा तथा संघ शासित अंडमान तथा नि कोबार द्वीप समूह है अधिक जानकारी के लिए (स्लेम-सी.पी.पी. का ब्राऊशर)

अधिक जानकारी के लिए>>>( स्लेम-सी.पी.पी. का ब्राऊशर)

 

अस्वीकरण ( डिस्क्लेमर): दिखाई गई सूचना को यथासंभव सही रखने के सभी प्रयास किए गए हैं। वेबसाइट पर उपलब्ध सूचना के अशुद्ध होने के कारण किसी भी व्यक्ति के किसी भी नुकसान के लिए भारतीय वानिकी अनुसन्धान एवं शिक्षा परिषद उत्तरदायी नहीं होगा। किसी भी विसंगति के पाए जाने पर head_it@icfre.org के संज्ञान में लाएं।