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भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद

(पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय, भारत सरकार )
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The President of India, Shri Pranab Mukherjee receiving the Report on ‘Health Status and Age Assessment of the Trees of Rashtrapati Bhavan’ from Dr. Savita, Director, Forest Research Institute, Dehradun at Rashtrapati Bhavan on the eve of demitting office as the 13th President of India on July 24, 2017

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भा.वा.अ.शि.प., देहरादून के विश्वविधालयों को अनुदान विमोचित करने के लिए संशोधित दिशानिर्देश (12वीं पंचवर्षीय योजना) अधतन: 30 अक्टूबर 2012    updated: 30.10.2012

 

12वीं पंचवर्षीय योजना अवधि (2012-2013 से 2016-17) के लिए वैज्ञानिकलिपिकीय संवर्गअनुसन्धान सहायक कर्मचारियों के क्षमता निर्माण के लिए मानव संसाधन विकास योजना  

   
  2011 के प्रत्यायन प्रमाणपत्र - 2011
 

 केन्द्रीय कृषि विश्वविधालय, पासीघाट (अरुणाचल प्रदेश)

 

डा. बाला साहेब सांवत कोनकन कृषि विधापीठ, दापोली (महाराष्ठ्र)
 

 हरियाण कृषि विश्वविधालय, हिसार (हरियाणा)

 

 एच.एन.बी. गढ़वाल विश्वविधालय, श्रीनगर, गढ़वाल

 

 महाराणा प्रताप कृषि तथा प्रौधोगिकी विश्वविधालय, उदयपुर (राजस्थान)

 

 नवसारी कृषि विश्वविधालय, नवसारी (गुजरात)

 

 उड़ीसा कृषि तथा प्रौधोगिकी विश्वविधालय, भुवनेश्वर (उड़ीसा)

 

 पंजाब कृषि विश्वविधालय, लुधियाना (पंजाब)

 

 शेर-ए-कश्मीर विश्वविधालय, श्रीनगर (जे एण्ड के)

 

2010 के प्रत्यापन प्रमाणपत्र

 

 बिरसा कृषि विश्वविधालय (बी.ए.यू.), रांची (झारखण्ड)

 

 केरल कृषि विश्वविधालय (के.ए.यू.), त्रिसूर (केरल)

 

 कुमाऊ विश्वविधालय, नैनीताल (उत्तराखण्ड)

   डा. पंजाबराव देशमुख कृषि (के.यू.) विधापीठ (पी.आर.डी.के.वी.), अकोला (महाराष्ठ्र)

 

 

 सैम हिगिनबाटम कृषि, प्रौधोगिकी तथा विज्ञान संस्थान (एस.एच.आई.ए.टी.एस.), इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)

 

 कृषि विश्वविधालय तमिलनाडु (टी.एन.ए.यू.), कोयम्बटूर (तमिलनाडू)

 

 कृषि विज्ञान विश्वविधालय (यू.ए.एस.), बैंगलोर (कर्नाटक)

 

 कृषि विज्ञान विश्वविधालय (यू.ए.एस.), धारवाड (कर्नाटक)

 

 डा. वाई. एस. परमार बागवानी एवं वानिकी (वाई.एस.पी.यू.एच.एफ.) विश्वविधालय, सोलन (हिमाचल प्रदेश)

     

 

विश्वविद्यालयों को सहायता अनुदान  

 

वर्ष 2012-13 के लिए नई अनुदान सहायता

डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ, दापोली (महाराष्ट्र)

व.अ.सं. विश्वविधालय, व.अ.सं. देहरादून

एच.एन.बी. गढ़वाल विश्वविधालय, श्रीनगर

केरल कृषि विश्वविधालय

महाराणा प्रताप कृषि तथा प्रौधोगिकी विश्वविधालय, झालावार

नवसारी कृषि विश्वविधालय, नवसारी

इलाहाबाद कृषि संस्थान-सम-विश्वविधालय, इलाहाबाद

शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौधोगिकी विश्वविधालय, श्रीनगर (जम्मू एण्ड कश्मीर)

तमिलनाडु कृषि विश्वविधालय

कृषि विज्ञान विश्वविधालय, बंगलौर (कर्नाटक)

वर्ष 2012-13 के लिए अनुदान का पुनवर्ैधीकरण

 

व.अ.सं. विश्वविधालय, देहरादून (उत्तराखण्ड)

वर्ष 2010-11 के लिए नई संस्वीकृतियां

डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ, दापोली (महाराष्ट्र)

व.अ.सं. विश्वविधालय, देहरादून (उत्तराखण्ड)

केन्द्रीय कृषि विश्वविधालय, पासीघाट (अरुणाचल प्रदेश)

 

डा. वाई. एस. पी. बागवानी एवं वानिकी विश्वविधालय, सोलन (हि.प्र.)

महाराणा प्रताप कृषि तथा प्रौधोगिकी विश्वविधालय, झालावार, राजस्थान

नवसारी कृषि विश्वविधालय, नवसारी, गुजरात

इलाहाबाद कृषि संस्थान-सम-विश्वविधालय, इलाहाबाद (यू.पी.)

तमिलनाडु कृषि विश्वविधालय, मेत्तुपलायम (तमिलनाडू)

कृषि विज्ञान विश्वविधालय, बंगलौर (कर्नाटक)
वर्ष 2011-12 के लिए अनुदान का पुनवर्ैधीकरण

व.अ.सं. विश्वविधालय, देहरादून (उत्तराखण्ड)

हरियाणा कृषि विश्वविधालय, हिसार

नवसारी कृषि विश्वविधालय, नवसारी (गुजरात)

केरल कृषि विश्वविधालय, त्रिसूर (केरल)

कुमाऊ विश्वविधालय, नैनीताल (उत्तराखण्ड)

 

पंजाब कृषि विश्वविधालय, लुधियाना (पंजाब)

 

 


10वीं योजना अवधि के दौरान भौतिकआर्थिक प्रापितयां


निदेशालय के कार्यकलाप विश्वविधालयों को अनुदान उपलब्ध करवाने के रुप में सहायता देना है। समस्त 26 विश्वविधालय जो भा.वा.अ.शि.प. से अनुदान प्राप्त करते है आज तक ' 18.69 करोड ' अनुदान प्राप्त कर चुके है।

उपयर्ुक्त के अतिरिक्त, निदेशालय अधिकारियोंवैज्ञानिकों की प्रतिनियुकित का कार्य भी देखता है जो कि देश में तथा विदेश में उनके ज्ञानकौशल के उन्नयन के लिए विभिन्न पाठयक्रमोंप्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए किया जाता है।



11वीं योजना के लिए परिकलपित क्रियाकलाप / कार्यक्रम:

(ए) विश्वविधालयों को अनुदान : इस योजना को ग्यारहवीं योजना अवधि के अधीन जारी रखने का प्रस्ताव है तथा इस उददेश्य के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार से 100 करोड़ के प्रावधान के लिए कहा गया है। इसके अतिरिक्त निदेशालय विश्वविधालयों में स्नातक स्तरस्नातकोत्तर स्तर पर दिये जा रहे पाठयक्रम को आधुनिक बनाने तथा उन्नयन करने के लिए प्रयास करता है ताकि पाठयक्रम को इकजुट किया जा सके। इन पाठयक्रमों के लिए मान्यता की योजना पेशेवर के रुप में भविष्य के लिए भी होगी।


(बी) बी : भारतीय वानिकी अनुसन्धान एवं शिक्षा परिषद ने लिपिकीय संवर्ग, वैज्ञानिक संवर्ग तथा तकनीकी संवर्ग के लिए पंचवर्षीय मानव संसाधन विकास कार्यक्रम अंगीकृत किया है तथा भा.वा.अ.शि.प. का यह वृहद मानव संसाधन विकास कार्यक्रम जो कि मुख्य रुप से एक वानिकी अनुसन्धान संस्था है का लक्ष्य है :

  • प्रबन्धकों तथा वरिष्ठ अनुसन्धान अध्येताओं के प्रबन्धन कौशल को बढ़ाना तथा उन्हे वानिकी अनुसन्धान में वर्तमान विचारों तथा परम्पराओं से अवगत रखना।
  • प्रशिक्षण, अनुसंधान कार्यशालाओं, सम्मेलनों इत्यादि के द्वारा अनुसन्धान अध्येताओं की मुख्य क्षमताओं को उनकी विशेषज्ञता के क्षेत्र में बढ़ाना।

  • सभी सहायक कर्मचारियों के सभी स्तरों पर व्यवसायिक कौशल, प्रयोगशाला प्रबन्धन, स्थल अणवेषण में सेवाकालीन प्रशिक्षण उपलब्ध करवाना।

उपयर्ुक्त लक्ष्यों को ध्यान में रखकर वर्तमान वित वर्ष में प्रथम फेज में निम्नलिखित प्रशिक्षण प्रारम्भ किये गये है जो कि निम्नलिखित है :

  • अनुसन्धान पद्धतिß पर प्रशिक्षण जो कि आई.ए.एस.आर.आई. नई दिल्ली में 7 जनवरी 2008 से 18 जनवरी 2008 तक आयोजित किया गया।

  • अनुसन्धान प्रबन्धन तथा प्रशासनß पर प्रशिक्षण जो कि 3 मार्च से 14 मार्च 2008 तक आयोजित किया गया।

  • मूल वानिकीß पर प्रशिक्षण जो कि 11 फरवरी से 18 अप्रैल 2008 तक आयोजित किया गया।

विशेषज्ञता के क्षेत्रों में प्रशिक्षण अनितम रुप प्राप्त करने की प्रक्रिया में है तथा इन्हे अगले वित्त वर्ष से आयोजित किया जायेगा।


(सी) नीति अनुसन्धान : शिक्षा निदेशालय को वानिकी के क्षेत्र में नीति अनुसन्धान का कार्य करने का अधिदेश है। उपयर्ुक्त अधिदेश के अनुरुप पर्यावरण एवं वन मंत्रालय भारत सरकार के आदेश सं 12-12006-थ्च् दिनांक 23 अगस्त 2006 के द्वारा नीति अनुसन्धान कार्य के विषय क्षेत्रों के मामलों को अनितम रुप प्रदान करने के लिए निम्नलिखित सदस्यों सहित एक समिति गठित की गई।


1. अतिरिक्त महानिदेशक (वन संरक्षण), एम.ओ.ई.एफ. --अध्यक्ष
2. महानिदेशक, भा.वा.अ.शि.प., देहरादून - सदस्य
3. अतिरिक्त महानिदेशक (वन्य जीव), एम.ओ.ई.एफ., नई दिल्ली -सदस्य या उनके प्रतिनिधि
4. उप वन महानिरीक्षक (एफ.पी.), एम.ओ.ई.एफ., नई दिल्ली -सदस्य
5. निदेशक, भारतीय वन्य जीव संस्थान, देहरादून - सदस्य
6. निदेशक आई.आई.एफ.एम., भोपाल - सदस्य
7. निदेशक, वन अनुसन्धान संस्थान, देहरादून - सदस्य
8. निदेशक, उष्णकटिबंधीय वन अनुसन्धान संस्थान, जबलपुर - सदस्य
9. प्रधान मुख्य वन संरक्षक, उत्तर प्रदेश. - सदस्य
10. प्रधान मुख्य वन संरक्षक, महाराष्ट्र - सदस्य
11. प्रधान मुख्य वन संरक्षक, कर्नाटक- सदस्य
12. प्रधान मुख्य वन संरक्षक, उड़ीसा - सदस्य
13.प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मध्य प्रदेश - सदस्य
14. प्रधान मुख्य वन संरक्षक, मेघालय - सदस्य
15.प्रतिनिधि जनजातीय मामला मंत्रालय, भारत सरकार - सदस्य
16. प्रतिनिधि टाटा सामाजिक विज्ञान, मुंबई - सदस्य
17. प्रतिनिधि आर्थिक विकास संस्थान, नई दिल्ली - सदस्य
18. प्रतिनिधि भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली - सदस्य
19. प्रो. जे. एस. सिंह, बनारस हिन्दू विश्वविधालय, भूतपूर्व सदस्य- Member NFC
20. डा. के. डी. सिंह, सेवानिवृत्ति एफ.ए.ओ. विशेषज्ञ, नई दिल्ली - सदस्य
21. श्री बी. के. पी. सिन्हा, पूर्व पी.सी.सी.एफ.,यू.पी. - सदस्य
22. डा. लीना श्रीवास्तव, कार्यकारी निदेशक, टेरी - सदस्य
23. श्री डी. सी. खंडूरी, पूर्व सदस्य, एन.एफ.सी. - सदस्य
24. उप महानिदेशक (शिक्षा), भा.वा.अ.शि.प., देहरादून - सदस्य सचिव

समिति की बैठक 19 अक्टूबर 2006 को आयोजित की गई ताकि मामलों पर विचार विमर्श किया जा सके तथा निम्नलिखित तीन विषयों पर कार्य प्रारम्भ करने का निर्णय लिया गया :

  • देश में वन तथा वृक्ष आवरण के अनुपात का आंकलन करने के लिए वैज्ञानिक आधार
  • गरीबी उन्मूलन की राष्ट्रीय प्राथमिकता से वानिकी की समबद्धता का विश्लेषण तथा राष्ट्रीय विकास परिप्रेक्ष्य के लक्ष्योंउददेश्यों के साथ नीति निर्धारण करना।
  • राष्ट्रीय वानिकी नीति 1988 के साथ सम्बनिधत सैक्टर की नीतियों में विसंगतियों की पहचान के लिए डेस्क समीक्षा तथा विसंगतियों को दूर करने के लिए सुझाव

 

 

परिषद ने समिति की अनुशंसाओं तथा सुझावों पर विचार किया और निर्णय लिया कि प्रथम चरण में पहले तीन विषय क्षेत्रों में कार्य किया जा सकता है तथा तदानुसार उपयर्ुक्त अध्ययन के लिए परामर्शी सेवाएं निम्नलिखित परामर्शदाताओं से प्राप्त की जाए :-

  • वन एवं पर्यावरण विज्ञान अकादमी, देहरादून
  • टी.एन.एस. - भारत प्राईवेट लिमिटेड, नई दिल्ली
  • श्री प्यारे लाल तथा अन्य; फगवाडा (पंजाब)

(डी) आपदा प्रबन्धन: भा.वा.अ.शि.प. ने परामर्शी सेवाएं, कार्यशालाए प्रशिक्षण तथा जागरुकता अभियान चलाने का प्रस्ताव रखा ताकि प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में वन पारितंत्रों की भूमिका को तथा इस प्रकार की विभत्स घटनाओं के प्रभावों को कम करने में इनकी भूमिका को पूर्ण रुप से समझा जा सके। परिषद तथा इसके संस्थानों को राष्ट्रीयअंतराष्ट्रीय स्तर पर संस्थानोंसंस्थाओं से जोडा जायेगा ताकि परामर्शी सेवाओं का आवश्यक भाग संभागीयराष्ट्रीय स्तर पर योजना उपायों पर लक्षित रहे : 

    

 

 

वन पुनरुत्पादक सामग्री रिपोर्ट

   

संक्षेप-सूची तथा तत्व

   

सारांश

   

प्रतिवेदन

 
   

परिशिष्ट I

   

परिशिष्ट II

   

परिशिष्ट III

   

परिशिष्ट IV  से  VI

   

परिशिष्ट VII

   

परिशिष्ट VIII

   

परिशिष्ट VI 2 का परिशिष्ट I

     

   

 

    पुरालेख  

 

 

 

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